Friday, August 5, 2011

आज भी रुलाती है दर्द !!

सब कहते थे बचपन में मैं बहुत जिद्दी था और काफी सरारती था!लेकिन जबसे समझदारी आई इतना कुछ समझ गया और समझ रहा हूँ की आज उन बातों को भी याद करता हूँ जो बचपन में नहीं समझ पाता था!

बहुत कस्ट और दुख देखा मैंने अपने जिन्दगी में ,कभी -कभी आत्महत्या का भी मन हो जाता था  लेकिन ये सोच के जीता रहा मेरी माँ ने मुझे इतना तक्तीफ उठा कर पला है ,मैं मर जाऊंगा तो उन्हें कोंन देखेगा,छोटे भाई और बहन को कोंन ख़ुशी देगा , ये सारी चीजें सोचता रहता था !

माँ की उम्मीद को तोड़ कर कैसे जा सकता था ,आज तक हर जख्म और मजबूरीयों को सहता रहा !


'मुझे याद है वो  दिन  जो आज भी दिलो में नफरत और रातों की नींद उडा देती है 'मेरी माँ चाचा से कुछ पैसे क़र्ज़ मांगने गयी थी तो चाचा ने कहा 'क़र्ज़  लेने तो आये हो लेकिन वापस कहा से करोगे ?'' बोली वापस कर दूंगी थोड़े समय बाद लेकिन उन्होंने मन कर दिया बिलकुल !
माँ रूम में आके बोली विनीत चाचा मना कर दिए और ये बोलके बहुत रोने लगी!कोई लाखो का क़र्ज़ नहीं मांगी थी सिर्फ 700 रूपये !वो मुझे पकड-२ के रोती रही उन्हें पाता चलने के वाबजूद भी नहीं दिए !
पूरी रात मैं सोच -२ के रोता रहा लेकिन काफी छोटा था मैं उस वक़्त कुछ नहीं कर सकता था !

लेकिन मैं कभी नहीं भूलूंगा ये दिन ,गलती उनकी नहीं ,कहते है न बुरे वक़्त पे कोई साथ नहीं देता ' इसको उन्होंने साबित किया " ऐसे बहुत सरे दिन आये ठोकर खाते रहे किसे दिलो की बात बताता !

मैं अपनी माँ,भाई ,बहन की खुशियों के लिए जीता हूँ और मैं उनका अहसान कभी नहीं भूलूंगा जिनके बदोलत आज मैं यहाँ तक पंहुचा हूँ ,वो मेरे फूफा जी है जिन्हें मैं कभी नहीं भूल सकता हूँ ,भले ही आज मैं दोड़ना  सिख गया लेकिन चलना उनोहने ही सिखाया !

आज मैं आपने आप से बहुत खुश हूँ !बहुत महनत करता हूँ आगे बड़ने के लिए और सबको खुश देखने के लिए !

सब कुछ रहते हुए पापा की कमी हमेशा रुलाती है ,आज वो होते तो शायद ऐसे दिन न देखने पड़ते!

जितना जिद्दी था बचपन में आज इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी आ गयी है की अपनी ख़ुशी को त्यागना पड़ता है !

सच पुछो तो दोस्त -मैं अपनी जिन्दगी नहीं जी रहा हूँ सिर्फ बेटा और बडा होने का फ़र्ज़ निभा रहा हूँ !
नींद नहीं आती सोच- सोच कर रोता हूँ कभी कभी आंसू नहीं रुकते तो लिख लेता हूँ दिलो की बात !

सुबह हो गयी लेकिन आखों में नींद नहीं फिर भी कोशिश करता हूँ !  

विनीत 

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