Tuesday, December 27, 2011

ए वक्त तू ही बता दे ,ये तुने क्या किया

ए वक्त तू ही बता दे ,ये तुने क्या किया ,
यादों को समेटने का ,भी वक्त ना दिया ।
कर लेते गुजरा हम यूँ ही ,'
चले हो तुम 'इशारा भी ना किया ।
सही -सलामत देख मुस्करा रहे हो तुम ,
बाद तेरे न पूछा 'मैं ' कैसे जिया ।
आंच न आये कोई ज़माने की तेरे ऊपर ,
तेरी उलझनों को खुद अपने उपर लिया है ।
तू बे-रहम बे-मुरव्वत है सुना था कभी ,
मगर तुने सब मेरे ही साथ क्यों किया ।
''कमलेश'कद्र करें वक्त की हमेशा सभी ,
क्यूँ की वक्त ने मौत को न वक्त दिया ॥

Friday, August 5, 2011

आज भी रुलाती है दर्द !!

सब कहते थे बचपन में मैं बहुत जिद्दी था और काफी सरारती था!लेकिन जबसे समझदारी आई इतना कुछ समझ गया और समझ रहा हूँ की आज उन बातों को भी याद करता हूँ जो बचपन में नहीं समझ पाता था!

बहुत कस्ट और दुख देखा मैंने अपने जिन्दगी में ,कभी -कभी आत्महत्या का भी मन हो जाता था  लेकिन ये सोच के जीता रहा मेरी माँ ने मुझे इतना तक्तीफ उठा कर पला है ,मैं मर जाऊंगा तो उन्हें कोंन देखेगा,छोटे भाई और बहन को कोंन ख़ुशी देगा , ये सारी चीजें सोचता रहता था !

माँ की उम्मीद को तोड़ कर कैसे जा सकता था ,आज तक हर जख्म और मजबूरीयों को सहता रहा !


'मुझे याद है वो  दिन  जो आज भी दिलो में नफरत और रातों की नींद उडा देती है 'मेरी माँ चाचा से कुछ पैसे क़र्ज़ मांगने गयी थी तो चाचा ने कहा 'क़र्ज़  लेने तो आये हो लेकिन वापस कहा से करोगे ?'' बोली वापस कर दूंगी थोड़े समय बाद लेकिन उन्होंने मन कर दिया बिलकुल !
माँ रूम में आके बोली विनीत चाचा मना कर दिए और ये बोलके बहुत रोने लगी!कोई लाखो का क़र्ज़ नहीं मांगी थी सिर्फ 700 रूपये !वो मुझे पकड-२ के रोती रही उन्हें पाता चलने के वाबजूद भी नहीं दिए !
पूरी रात मैं सोच -२ के रोता रहा लेकिन काफी छोटा था मैं उस वक़्त कुछ नहीं कर सकता था !

लेकिन मैं कभी नहीं भूलूंगा ये दिन ,गलती उनकी नहीं ,कहते है न बुरे वक़्त पे कोई साथ नहीं देता ' इसको उन्होंने साबित किया " ऐसे बहुत सरे दिन आये ठोकर खाते रहे किसे दिलो की बात बताता !

मैं अपनी माँ,भाई ,बहन की खुशियों के लिए जीता हूँ और मैं उनका अहसान कभी नहीं भूलूंगा जिनके बदोलत आज मैं यहाँ तक पंहुचा हूँ ,वो मेरे फूफा जी है जिन्हें मैं कभी नहीं भूल सकता हूँ ,भले ही आज मैं दोड़ना  सिख गया लेकिन चलना उनोहने ही सिखाया !

आज मैं आपने आप से बहुत खुश हूँ !बहुत महनत करता हूँ आगे बड़ने के लिए और सबको खुश देखने के लिए !

सब कुछ रहते हुए पापा की कमी हमेशा रुलाती है ,आज वो होते तो शायद ऐसे दिन न देखने पड़ते!

जितना जिद्दी था बचपन में आज इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी आ गयी है की अपनी ख़ुशी को त्यागना पड़ता है !

सच पुछो तो दोस्त -मैं अपनी जिन्दगी नहीं जी रहा हूँ सिर्फ बेटा और बडा होने का फ़र्ज़ निभा रहा हूँ !
नींद नहीं आती सोच- सोच कर रोता हूँ कभी कभी आंसू नहीं रुकते तो लिख लेता हूँ दिलो की बात !

सुबह हो गयी लेकिन आखों में नींद नहीं फिर भी कोशिश करता हूँ !  

विनीत 

ये ज़िन्दगी आईने को भी आइना दिखा देती है 
इंसान का क्या ,पत्थर को भी खुदा बता  देती है !!

जब भी चलती है एक कारवां  संग चलता है 
रूक जाए  तो सिकंदर को भी रास्ता दिखा देती है !!

टूटते ख़्वाबों के दरमियाँ बनते बिगड़ते रिश्ते 
ये तो हर इक   रिश्ते का मतलब सिखा देती है !!

मुकम्मल जहां की तलाश में कुछ न हो हासिल 
ये मगर मौत का तोहफा दे एहसान जता देती है !!

देखते ,ढूंढते ,समझते रहे सारे कायनात को 
ये मगर वो किताब है जो हमें खुद का  पता देती है !!

यही   दोस्त ,यही दुश्मन ,यही हमसफ़र है "नील"  
ये गर चाहे  तो मरघट में भी घरौंदा बसा देती है  !!

मैंने ज़िन्दगी देखी है!!


रोज़ रात सजती महफ़िलों में
अक्सर ख़ामोश तनहाई देखा है
सच कहूँ
मैंने ज़िन्दगी देखी है
फ़क़त हँसाना जिनका पेशा है
उनकी आँखों में नमी देखी है
सच कहूँ
मैंने ज़िन्दगी देखी है
इक जनाज़े को कंधा दिया एक दिन
क्या होती है किसी की कमी, देखा है
सच कहूँ
मैंने ज़िन्दगी देखी है
कल तमाम रात रोते हुए गुज़री
सुबह बिस्तर पे फ़िज़ा शबनमी देखी है
सच कहूँ
मैंने ज़िन्दगी देखी है
उन दिनों
जब मैं दर्द से तड़पता था
कई दिलों में सुकूँ
कई चेहरों पे हँसी देखी है॥
सच कहूँ
मैंने ज़िन्दगी देखी है
वो जो दुनिया को ख़ाक़ करने चले थे
जहाँ दबे हैं वे
वो ज़मीं देखी है
सच कहूँ
मैंने ज़िन्दगी देखी है

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है !!

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है ,

ना मा, बाप, बहन , ना यहा कोई भाई है .

हर लडकी का है Boy Friend, हर लडके ने Girl Friend पायी है ,

चंद दिनो के है ये रिश्ते , फिर वही रुसवायी है .



घर जाना Home Sickness कहलाता है ,

पर girl Friend से मिलने को टाईम रोज मिल जाता है .

दो दिन से नही पुछा मां की तबीयत का हाल ,

boy Friend से पल - पल की खबर पायी है,

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है …..



कभी खुली हवा मे घुमते थे ,

अब AC की आदत लगायी है .

धुप हमसे सहन नही होती ,

हर कोई देता यही दुहाई है .



मेहनत के काम हम करते नही ,

इसीलिये Gym जाने की नौबत आयी है .

McDonalds, PizaaHut जाने लगे,

दाल- रोटी तो मुश्कील से खायी है .

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है …..


Work Relation हमने बडाये ,

पर दोस्तो की संख्या घटायी है .

Professional ने की है तरक्की ,

Social ने मुंह की खायी है.

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है!